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जल शक्ति सार्मथ्य
जल शक्ति सिनेरियो
50,000 MW प्रस्ताव
जल शक्ति तकनीक
जल शक्ति नीति

परिचय

 

वर्तमान में एनएचपीसी लिमिटेड भारत में जल विद्युत विकास के लिए सबसे बड़ा संगठन बन गई है, जो जल विद्युत परियोजनाओं की स्थापना संबंधी परिकल्पना से संचालन तक की सभी गतविधियों को पूरा करने की योग्यता रखती है एनएचपीसी लिमिटेड देश में पवन ऊर्जा एवं टाइडल परियोजनाएं बनाने की भी योजना बना रही है

 

एनएचपीसी लिमिटेड का वर्तमान में संयुक्त उद्यम के तौर पर बनाई गई परियोजनाओं सहित स्वामित्व आधार पर 13 जल विद्युत स्टेशनों से 5175 मेगावाट का संस्थापित आधार है इन परियोजनाओं के कार्यान्वयन के दौरान प्रतिकूल भू-गर्भीय स्थितियों, कठिन कानून व्यवस्था की समस्याएं दुर्गम एवं दूर-दराज के स्थानों जैसी बाधाओं पर विचार करते हुए अब तक की यह उपलब्धि सराहनीय है इन स्टेशनों का उत्पादन निष्पादन उत्कृष्ट रहा है

 

एनएचपीसी वर्तमान में 4622 मेगावाट की कुल संस्थापित क्षमता वाली 11 परियोजनाओं के निर्माण में व्यस्त हैं देश में जल विद्युत विकास पर पुन: जोर देते हुए, एनएचपीसी लिमिटेड बारहवीं योजना (वर्ष 2017) की समाप्ति तक 10000 मेगावाट से अधिक जल विद्युत क्षमता संवर्धन करने की वृहद योजना तैयार कर चुकी है

 

 

 

 

 

 

नक्‍शे के लिए

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

विकासाधीन

 

मंजूरी के लिए प्रतीक्षारत

 

"मंजूरी के लिए प्रतीक्षारत " श्रेणी की परियोजनाएं सीडब्ल्यूसी/सीईए/एमओपी/ एमओडब्ल्यूआर/पीआईबी से अनेक सांविधिक मंजूरियों तथा डीपीआर तैयार करने के उपरांत आर्थिक मामले पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) से निवेश मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही है

 

 

 

सर्वेक्षण एवं अनुसंधान चरण के अधीन

 

"सर्वेक्षण एवं अनुसंधान चरण के अधीन " श्रेणी के अंदर आने वाली परियोजनाएं विभिन्न सांविधिक मंजूरियां प्राप्त करने के लिए परियोजना के पीएफआर/एफआर/डीपीआर की तैयार हेतु सर्वे अनुसंधान हेतु हैं इन रिपोर्टों की तैयार के लिए, अनेक हाइड्रोलॉजिकल, जियोलॉजिकल, मेट्रोलॉजिकल, विद्युत संभाव्यता अध्ययन इत्यादि परियोजना साइट पर ही पूरे किए गए हैं

 

विकासाधीन (मंजूरी की प्रतीक्षारत )

                                                   06.08.2009 को अद्यतन

 

क्रम सं.

परियोजना

राज्य

संस्थापित क्षमता (मेगावाट)

कुल क्षमता (मेगावाट)

1.

दिबांग

अरूंणाचल प्रदेश

12*250

3000

2.

कोटली भेल चरण-। बी

उत्तराखण्ड

4*80

320

3.

कोटली भेल चरण-।।

उत्तराखण्ड

8*66.25

530

4.

कोटली भेल चरण-। ए

उत्तराखण्ड

3*65

195

5.

तीस्ता-IV

सिक्किम

4*130

520

6.

लोकतक डाउनस्ट्रीम*

मणिपुर

2*33

66

7.

पकलदुल व अन्य चिनाब बेसिन की परियोजनाएं*

जम्मू व कश्मीर

-

2100

8.

तवांग-।।

अरूंणाचल प्रदेश

4*250

1000

 

 

 

कुल

7731

*लोकतक डाउनस्ट्रीम मणिपुर सरकार के साथ संयुक्त उद्यम के अधीन कार्यान्वित किया जा रहा है । पकलदुल व अन्य चिनाब बेसिन की परियोजनाएं का क्रिर्यान्‍वयन जे के पी डी सी तथा पी टी सी के साथ संयुक्‍त उधम के अधीन किया जा रहा है ।

 दिबांग परियोजना में आपका स्वागत है

 

परिचय

 

            दिबांग बहुउद्देश्यीय परियोजना एक जल विद्युत कम - बाढ़ नियंत्रण परियोजना है । यह योजना अरूंणाचल प्रदेश के लोअर दिबांग जिले में दिबांग नदी पर प्रस्तावित है । परियोजना का बांध स्थल आशु पानी तथा दिबांग नदियों के संगम से 1.5 कि.मी. दूर अपस्ट्रीम में स्थित है । यह स्थान रोइंग जिला मुख्यालय से 43 कि.मी.0 दूरी पर है । इस परियोजना से पूरे मानसून अवधि में दिबांग बांध के डाउन स्ट्रीम क्षेत्र में 3000 क्यूमेक्स तक बाढ़ नियंत्रण किया जा सकेगा ।

 

अवस्थिति

अरूंणाचल प्रदेश के लोअर दिबांग वैली जिले में रोइंग के निकट गांव मुनली

पहुंच

निकटतम रेल हेड - तिनसुकिया ( 153 कि.मी.)  निकटतम एयरपोर्ट - डिब्रूगढ़ (198 कि.मी.)

क्षमता

3000 मेगावाट ( 12 x 250 मेगावाट)

वार्षिक उत्पादन

11330 मिलियन यूनिट (90% आश्रित वर्ष पर)

परियोजना लागत

15886.40 करोड़ रूंपए (नवंबर,2007 के मूल्य स्तर पर )

लाभभोक्ता राज्य

सभी उत्तर पूर्वी एवं पूर्वी राज्य

टैरिफ/ दर

3.10 रूं. प्रति केडबल्यूएच (नवंबर , 07 के मूल्य स्तर पर )

संचालन का वर्ष /पूरा होने का कार्यक्रम

भारत सरकार द्वारा निवेश मंजूरी प्रदान किए जाने की तारीख से 9 वर्ष तक ।

 

तकनीकी विशेषताएं

बांध

नीवं की अधिकतम गहराई स्तर से ऊपर 288 मी. ऊँची , क्रक्रीट ग्रेविटी बांध

हेडरेस टनल

9 मी. व्यास की 300 मी. से 600 मी. लंबी  हॉर्श शू आकार की हेडरेस टनल

पावर हाउस

भूमिगत

टरबाइन का प्रकार

फ्राँसिस

नेट रेटेड हेड

233 मी.

टेलरेस टनल

9.0 मी.की व 320 मी. से 470 मी. लंबी 6 हार्श शू आकार की 6 टेल रेस टनल

 

 

 

 

 

 

वर्तमान स्थिति 31.07.2009

 

 

  • पीआईबी ने परियोजना पर अपनी सिफारिशें 28.01.2008 को सीसीईए को भेज दी हैं ।
  • पर्यावरण वन मंत्रालय से निर्माण पूर्व गतिविधियों के लिए मंजूरी मिल गई है तथा ई.आई.ए. अध्‍ययनों के संदर्भ में भी ई.आई.ए. अधिसूचना 2006 के तहत दिनांक 17.08.2009 को मंजूरी प्राप्‍त हो गई है । 
  • वन भूमि के डाइवर्जन के लिए राज्य वन विभाग द्वारा कार्य किया जा रहा है । इस मामले हेतु एनएचपीसी राज्य सरकार के संपर्क में है ।
  • परियोजना को सीसीईए के समक्ष लाने हेतु अपेक्षित अन्य सांविधिक मंजूरियां प्राप्त की जा रही  हैं ।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


कोटली भेल चरण-1 बी परियोजना में आपका स्वागत है

 

परिचय

 

कोटली भेल चरण-।बी परियोजना उत्तराखण्ड के  टिहरी गढ़वाल जिले में गंगा की सहायक नदी अलकनंदा पर प्रस्तावित एक बहते पानी की योजना है ।

 

मुख्य विशेषताएं

अवस्थिति

उत्तराखण्ड के टिहरी गढ़वाल के देव प्रयाग के निकट गांव पाली

पहुंच

निकटतम रेल हेड  ऋिषकेश ( 78 कि.मी. ) निकटतम एयरपोर्ट - जोलीग्रांट, देहरादून ( 96 मी.मी.)

क्षमता

320मेगावाट (4न्80 मेगावाट )

वार्षिक उत्पादन

1278.3  मिलियन यूनिट (90% आश्रित वर्ष पर)

परियोजना लागत

1891.90करोड़ रूंपए ( सितंबर, 2006 के मूल्य स्तर पर)

लाभभोक्ता राज्य

जम्मू व कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा,उत्तर  प्रदेश, उत्तराखण्ड, राजस्थान, संघ शासित क्षेत्र दिल्ली तथा चण्डीगढ़

टैरिफ/ दर

2.86 रूं./ केडबल्यूएच (अगस्त, 2006 के मूल्य स्तर पर)

संचालन का वर्ष/ पूरा होने का कार्यक्रम

भारत सरकार द्वारा निवेश मंजूरी प्रदान किए जान की  तारीख से  से 4 वर्ष 6 महीने

 

तकनीकी विशेषताएं

बांध

नीवं की अधिकतम गहराई स्तर से ऊपर  90 मी. ऊँची  कंक्रीट ग्रेविटी बांध

प्रैशर शॉफ्ट

चार  5.5 मी. व्यास वाली   217 मी., 217 मी., 218 मी. एवं 220 मी. लंबी गोल आकार की पेनस्टाक्स

पावर हाउस

सतही

टरबाइन का प्रकार

फ्राँसिस

नेट रेटेड हेड

60.36 मी.

टेल रेस टनल

230 मा.लंबी टेल रेस चैनल

 

वर्तमान स्थिति

(30.06.2009 को )

·         कार्यान्वयन करार पर दिनांक 08.06.2006 को एनएचपीसी और उत्तराखण्ड सरकार के बीच हस्ताक्षर किया गया ।

·         पीआईबी ने परियोजना पर अपनी सिफारिशें 7.2.2007 को सीसीईए को भेज दी हैं ।

·         पर्यावरण तथा वन मंत्रालय द्वारा 14.08.2007 को पर्यावरण मंजूरी प्रदान की गई।

·         एनएचपीसी द्वारा दायर की गई याचिका पर वन मंजूरी के संदर्भ में भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 20.02.2009 को एक आदेश पारित किया है कि सीईसी की सिफारिशों के आधार पर एफएसी नया निर्णय दे । मामले पर एफएसी चर्चा कर रहा है ।


कोटली भेल चरण-।। परियोजना में आपका स्वागत है

 

परिचय

 

  कोटली भेल जल विद्युत परियोजना चरण-।।  उत्तराखण्ड के पौढ़ी व टिहरी गढ़वाल जिले मे गंगा नदी पर बहते पानी  की योजना है ।

 

मुख्य विशेषताएं

अवस्थिति

उत्तराखण्ड के पौढ़ी व टिहरी गढ़वाल जिले के देव प्रयाग के निकट गांव पाली

पहुंच

निकटतम रेल हेड  षिकेश (78कि.मी. ) निकटतम एयरपोर्ट - देहरादून (96 कि.मी.)

क्षमता

320 मेगावाट (4*80 मेगावाट )

वार्षिक उत्पादन

1278.3 मिलियन यूनिट (90% आश्रित वर्ष पर)

परियोजना लागत

1891.90 करोड़ रूंपए (सितंबर, 2006 के मूल्य स्तर पर)

लाभभोक्ता राज्य

जम्मू व कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, राजस्थान, संघ शासित क्षेत्र दिल्ली तथा चण्डीगढ़

टैरिप / दर

2.56 रू./ केडबल्यूएच (अक्‍टूब, 2006 के मूल्य स्तर पर)

संचालन का वर्ष /पूरा होने का कार्यक्रम

भारत सरकार द्वारा निवेश मंजूरी प्रदान किए जाने की तारीख से 4 वर्ष 6 महीने

 

तकनीकी विशेषताएं

बांध

नींवं की अधिकतम गहराई स्तर से ऊपर 82 मी. उॅचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध

प्रैशर शॉफ्ट / पेन स्टाक्स

चार 6.8 मी. व्यास की 8 , 140 मी.  लंबे सर्कुलर आकार के पनेस्टॉक्स

पावर हाउस

भूमिग

टरबाइन का प्रकार

फ्राँसिस टरबाइन

नेट रेटेड हेड

60.36

टेलरेस टनल

10 मी. व्यास की 350 मी. ,350 मी. ,345 मी. 320मी. लंबी 4 हार्श शू आकार की

 

वर्तमान स्थिति (31.07.2009 को )

 

·         कार्यान्वयन करार पर दिनांक 08.06.2006 को एनएचपीसी और उत्तराखण्ड सरकार के बीच हस्ताक्षर किया गया ।

·         पीआईबी ने परियोजना पर अपनी सिफारिशें  15.05.2007 को सीसीईए को भेज दी हैं ।

·         पर्यावरण तथा वन मंत्रालय द्वारा 23.08.2007 को पर्यावरण मंजूरी प्रदान की गई।

·         एनएचपीसी द्वरा दायर की गई याचिका पर वन मंजूरी के संदर्भ में भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 20.02.2009 को एक आदेश पारित किया है कि सीईसी की सिफारिशों के आधार पर एफएसी नया निर्णय दे । मामल  एफएसी के विाराधीन है ।
कोटली भेल चरण-1 ए परियोजना में आपका स्वागत है

 

परिचय

 

  कोटली भेल चरण-।ए परियोजना उत्तराखण्ड के टिहरी गढ़वाल जिले में गंगा की सहायक नदी भागीरथी पर प्रस्तावित एक बहते पानी की योजना है ।

 

अवस्थिति

उत्तराखण्ड के टिहरी गढ़वाल जिले के देव प्रयाग के निकट गांव मुनेठ

पहुंच

निकटतम रेल हेड  षिकेश ( 74 कि.मी. ) निकटतम एयरपोर्ट - देहरादून ( 93 मी.मी.)

क्षमता

195 मेगावाट (3 x 65 मेगावाट )

वार्षिक उत्पादन

1025.05 मिलियन यूनिट (90% आश्रित वर्ष पर)

परियोजना लागत

1138.02 करोड़ रूंपए (अगस्त, 2006 के मूल्य स्तर पर)

लाभभोक्ता राज्य

जम्मू व कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, राजस्थान, संघ शासित क्षेत्र दिल्ली तथा चण्डीगढ़

टैरिफ/ दर

2.15 रूं./ केडबल्यूएच (अगस्त, 2006 के मूल्य स्तर पर)

संचालन का वर्ष/ पूरा होने का कार्यक्रम

भारत सरकार द्वारा निवेश मंजूरी प्रदान किए जाने की तारीख से 4 वर्ष 6 महीने

 

तकनीकी विशेषताएं

बांध

नीवं की अधिकतम गहराई स्तर से  82.5 मी. ऊँची  कंक्रीट ग्रेविटी बांध

हेडरेस टनल

9.5 मी. व्यास की  145 मी. लंबी डी आकार की हेडरेस टनल

पावर हाउस

भूमिगत

टरबाइन का प्रकार

फ्राँसिस

नेट रेटेड हेड

63.33 मी.

टेलरेस टनल

11 मी. व्यास वाली 50 मी0 लंबी 3 भागों में विभक्त  6.35 मी. व्यास प्रत्येक की 110 मी0 102 मी. और 125 मी. लंबी डी आकार की टेलरेस टनलें ।

 

वर्तमान स्थिति

·         कार्यान्वयन करार पर दिनांक 8.6.2006 को एनएचपीसी और उत्तराखण्ड सरकार के बीच हस्ताक्षर किया गया ।

·         पीआईबी ने परियोजना पर अपनी सिफारिशें 7.2.2007 को सीसीईए को भेज दी हैं ।

·         पर्यावरण तथा वन मंत्रालय द्वारा 09.05.2007 को पर्यावरण मंजूरी प्रदान की गई ।

·         एनएचपीसी द्वारा दायर की याचिका गई पर वन मंजूरी के संदर्भ में भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 20.02.2009 को एक आदेश पारित किया है कि सीईसी की सिफारिशों के आधार पर एफएसी नया निर्णय दे । मामले पर एफएसी चर्चा कर रहा है ।
तीस्ता-IV परियोजना में आपका स्वागत है

 

परिचय

 

  तीस्ता चरण - IV जल विद्युत  परियोजना  तीस्ता बेसिन में तीस्ता नदी के क्रम प्रपात पर विकसित की जा रही बहते पानी की परियाजनओं का एक भाग है । तीस्ता सिक्किम की सबसे बड़ी नदी है और राज्य का लगभग 95% क्षेत्र इस विशाल नदी के प्रभाव क्षेत्र में आता है ।  

 

विशेषताएं 

 

मुख्य विशेषताएं

अवस्थिति

सिक्किम के नार्थ सिक्किम जिले में मंगन के निकट गांव चन्‍दरी

पहुंच

निकटतम रेल हेड -  न्यू जलपाईगुड़ी( 150कि.मी.) निकटतम एयरपोर्ट, बागडोगरा( 175 कि.मी.)

क्षमता

520 मेगावाट (4x130 मेगावाट )

वार्षिक उत्पादन

2329.50 मिलियन यूनिट (90% आश्रित वर्ष पर)

परियोजना लागत

4234.29  करोड़ रूंपए (जुलाई,2009 के मूल्य स्तर पर)

लाभभोक्ता राज्य

सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, झारखण्ड

टैरिफ/ दर

4.31रू./ केडबल्यूएच (जुलाई,2009 के मूल्य स्तर पर)

संचालन का वर्ष/ पूरा होने का कार्यक्रम

भारत सरकार द्वारा निवेश मंजूरी प्रदान किए जाने की तारीख से 77 महीने

 

तकनीकी विशेषताएं

बांध

नीवं की अधिकतम गहराई स्तर से ऊपर  108.50 मी. ऊँची कंक्रीट ग्रेविटी बांध

हेडरेस टनल

8 मी0 व्यास की 6.59 कि.मी. एवं 6.49 कि.मी. लंबी हॉर्श शु कार की 2 हेडरेस टनल .

पावर हाउस

भूमिगत

टरबाइन का प्रकार

फ्राँसिस टरबाइन

नेट रेटेड हेड

151.81 मी.  (नवंबर से अप्रैल), 141.81मी. (मई से अक्तूबर)

टेलरेस टनल

दो 8 मी0 व्यास की, 622 मी. व 627 मी लंबी हॉर्श शू आकार की टेल  रेस टनल

 

वर्तमान स्थिति (30.07.2009 को)

 

·         कार्यान्वयन करार पर दिनांक 01.03.2006 को एनएचपीसी सिक्किम सरकार के बीच हस्ताक्षर किया गया ।

·         एमओईएफ से दिनांक 04.06.2009 को  निर्माण पूर्व की उन गतिविधियों के लिए स्वीकृति प्राप्त कर ली गई थी जो ईआईए की रिपोर्ट तैयार करने के लिए संदर्भित थी।  

·         ईआईए एवं ईएमपी अध्ययन प्रगति पर है ।

·         डीपीआर 31.03.2008 को सीईए को सहमति के लिए प्रस्तुत की गई है । सीईए, सीडबल्यूसी,       

   जीएसआई इत्यादि द्वारा डीपीआर की जांच की जा रही है । डीपीआर की जांच के दौरान    

   सीईए/जीएसआई ने बांध पावर हाउस के लिए जियालॉजिकल सहयोग की सिफारिश की

   थी, तदनुसार अतिरिक्त अन्वेषण कार्य किए गए तथा एनएचपीसी द्वारा दिनांक

   31.07.2009 को संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट सीईए को प्रस्तुत की गई
लोकतक डाउनस्ट्रीम परियोजना में आपका स्वागत है

 

परिचय

 
   लोकतक डाउनस्ट्रीम जल विद्युत  परियोजना बहते पानी की योजना है । यह परियोजना  मार्च, 1983 से संचालित लोकतक पावर स्टेशन से निकलने वाले जल का उपयोग करेगी ।  

 

मुख्य विशेषताएं

अवस्थिति

जिला तोमेंगलांग, मणिपुर

पहुंच

निकटतम रेल हेड - दीमापुर (350 कि.मी.) हवाई अड्डा - इम्फाल

क्षमता

66 मेगावाट (2x33 मेगावाट )

वार्षिक उत्पादन

330.24  मिलियन यूनिट (90% आश्रित वर्ष पर)

परियोजना लागत

627 करोड़ रूंपए (अक्तूबर, 2006 के मूल्य स्तर पर)

संचालन का वर्ष/ पूरा होने का कार्यक्रम

भारत सरकार द्वारा निवेश मंजूरी प्रदान किए जाने की तारीख से 6 वर्ष 6 महीना

 

तकनीकी विशेषताएं

बैराज

आरसीसी राफ्ट के साथ 28 मी. ऊँची व 120.2 मी. लंबा बैराज

हेडरेस टनल

एक 5.3 मी0 गोलाकार हार्श-शू आकार, 5.8 कि.मी. लंबी हेड  रेस टनल

पावर हाउस

सतही

टरबाइन का प्रकार

फ्रांसिस

नेट रेटेड हेड

112 मी.

टेलरेस टनल

30 मी. चौड़ी एवं 746 मी. लंबी रेक्टएंगुलर आकार

 

वर्तमान स्थिति (30.06.2009 )

 

  • संयुक्त उद्यम आधार पर इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए मणिपुर सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर दिनांक 14.09.2009 को हस्ताक्षर किया गया ।
  • पीआईबी ने परियोजना पर अपनी सिफारिशें 23.11.2006 को सीसीईए को भेज दी हैं ।
  • ईआईए तथा ईएमपी अध्ययन प्रगति पर है ।
  • संयुक्त उद्यम कंपनी बनाने के लिए एनएचपीसी तथा मणिपुर सरकार के बीच 26.09.2008 को प्रमोटर्स करार पर हस्ताक्षर किए गए हैं ।
  • संयुक्त उद्यम कंपनी बनाने हेतु स्वरूप तैयार कर लिया गया है ।

पकलदुल तथा अन्य चिनाब बेसिन परियोजनाओं में आपका स्वागत है

 

परिचय

 

लगभग 21000 मेगावाट क्षमता वाली पकलदुल तथा अन्य दो परियोजनाओं का निर्माण प्रस्तावित है ये परियोजनाएं संयुक्त उद्यम कंपनी के तौर पर निर्माण के लिए दिनांक 10.10.2008 को एक करार पर हस्ताक्षर किए गए

 

विशेषताएं

 

पकलदुल (द्रंग धुरन) जल विद्युत परियोजना एक जलाशय (रिजर्वायर) आधारित योजना है । यह परियोजना जम्मू व कश्मीर के डोडा जिले की किश्तवाड़ तहसील में चिनाब नदी के मुख्य दाएं तट की सहायक नदी मरूंसूदर पर प्रस्तावित है । इस परियोजना के अन्तर्गत द्रंगधूरन गांव के निकट मरूंसुदर नदी के आर-पार एक कंक्रीट ग्रेविटी बांध तथा त्रिमुली गांव के निकट दुल बांध के अपस्ट्रीम  से 2 कि.मी. पर एक भूमिगत पावर हाउस बनाया जाना है । जलाशय की पूर्णता के स्तर   (ईएल 1700 मी. ) पर जलाशय में सकल भण्डारण 125.4 एमसीएम रहेगा ।  

 

मुख्य विशेषताएं

अवस्थिति

जम्मू व कश्मीर  के किश्तवाड़ जिले में गांव पकल के निकट

पहुंच

निकटतम रेल हेड - जम्मू ( 286 कि.मी.) निकटतम एयरपोर्ट, जम्मू (286 कि.मी.)

क्षमता

1000 मेगावाट (4x250 मेगावाट )

वार्षिक उत्पादन

3228.41 मिलियन यूनिट (90% आश्रित वर्ष पर)

परियोजना लागत

7464.05 करोड़ रूपए (नवंबर,2008 के मूल्य स्तर पर)

लाभभोक्ता राज्य

जम्मू व कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, राजस्थान, संघ शासित क्षेत्र दिल्ली तथा चण्डीगढ़

टैरिफ/ दर

5.84रू./ केडबल्यूएच (नवंबर, 2008 के मूल्य स्तर पर)

संचालन का वर्ष/ पूरा होने का कार्यक्रम

भारत सरकार द्वारा निवेश मंजूरी प्रदान किए जाने की तारीख से 6 वर्ष

 

तकनीकी विशेषताएं

बांध

नीवं की अधिकतम गहराई स्तर से  168 मी. ऊँच कंक्रीट बांध

हेडरेस टनल

7.2 मी. व्यास की प्रत्येक 10 कि.मी. लंबी हार्श शू / सर्कुलर आकार की हेड रेस टनल

टरबाइन का प्रकार

वर्टिकल फ्राँसिस टरबाइन

रेटेड हेड

395.23 मी.

टेल रेस टनल

5.5 मी. व्यास की , प्रत्येक 125 मी. लंबी हॉर्श शू आकार की चार टेल रेस टनल

            स्थिति 31.07.2009

 

·         सीईए ने दिनांक 03.10.2006 के पत्र के अनुसार टीईए प्रदान कर दिया है ।

·         पर्यावरण व वन मंत्रालय से पर्यावरण मंजूरी दिनांक 29.02.2008 को मिल गई है ।

·         किश्‍तवाड के सघन उंचाई वाले क्षेत्रों के वन क्षेत्र के अन्‍दर नैशनल पार्क का मामला सी.ई.सी. के विचाराधीन है । 

·         क्रमश: 49%, 49% एवं 2% इक्विटी पैटर्न पर एक संयुक्त उद्यम बनाकर  इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए दिनांक 10.10.2008 को एनएचपीसी, जेकेएसपीडीसी, जम्मू व कश्मीर सरकार एवं पीटीसी के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया ।

·          संयुक्त उद्यम कंपनी बनाने हेतु इसका स्वरूप तैयार किया जा रहा है ।

·  
विकासाधीन  सर्वेक्षण एवं अन्वेषण के अधीन

दिनांक 31.07.2009 को अद्यतन  

 

क्रम सं.

परियोजना

देश/राज्य

संस्थापित क्षमता मेगावाट

कुल क्षमता

1.

बरसर

जम्मू व कश्मीर

4*255

1020

2.

करमोली लुमटी तुली

उत्तराखण्ड

2*27.5

55

3.

गरबा तवाघाट

उत्तराखण्ड

3*210

630

4.

चंगरचुल

उत्तराखण्ड

2*120

240

5.

लाचेन

सिक्किम

3*70

210

6.

तवांग-।

अरूंणाचल प्रदेश

3*250

750

7.

सुबानसिरी (मिडिल)

अरूंणाचल प्रदेश

8*200

1600

8.

सुबानसिरी (अपर)

अरूंणाचल प्रदेश

8*250

2000

 

 

कुल

 

6505

 

सर्वेक्षण एवं अन्वेषण स्तर की श्रेणी वाली परियोजनाओं की पीएफआर/एफआर/डीपीआर आदि तैयार करने के लिए वैधानिक मंजूरी हेतु प्रक्रियाधीन नहीं है इस परियोजना के निर्माण के लिए विभिन्न हाइड्रालॉजिकल, जियोलॉजिकल, मैटिरीयलॉजिकल, पावर पोटेन्सियल अध्ययन आदि परियोजना स्थलों पर किए जा रहे हैं  


बरसर परियोजना में आपका स्वागत है

 

परिचय

 

  बरसर जल विद्युत परियोजना एक भण्डारण परियोजना है । इस परियोजना में जल के बहाव को केवल इस परियोजना के लाभ हेतु नियंत्रित नहीं किया जाएगा बल्कि इससे, इसके डाउनस्ट्रीम की सभी परियोजनाओं अर्थात पकलदुल, दुलहस्ती, रिटले, बगलिहार, सावलकोट तथा सलाल जल विद्युत परियोजनाओं को भी लाभ होगा और डाउनस्ट्रीम की इन सभी परियोजनाओं की संभाव्यता मे वृद्धि हो सकेगी । इस परियोजना का बांध हंजल गांव के निकट चिनाव नदी के मुख्य दाएं तट की सहायक नदी मरूंसुदर पर स्थित है । इस परियोजना के बनने से चिनाब घाटी के इन सभी पावर स्टेशनों की निश्चित उत्पादन क्षमता  90% आश्रित वर्ष में तीन गुना हो जाएगी तथा सर्दी के महीनों में जल उपलब्धता की कमी को पूरा किया जा सकेगा । स्टोरेज की यह व्यवस्था पानी के कम बहाव वाले महीनों के दौरान अतिरिक्त विद्युत उत्पादन तथा डाउनस्ट्रीम में पानी के बहाव को समान बनाए रखने की दृष्टि से की गई है

 

विशेषताएं

 

मुख्य विशेषताएं

अवस्थिति

जम्मू व कश्मीर राज्य के जिला किश्तवाड़  के निकट गांव हंजल

पहुंच

निकटतम रेल हेड  वएयरपोर्ट- जम्मू (310 कि.मी.)

क्षमता

1020  मेगावाट (4x225 मेगावाट )

वार्षिक उत्पादन

2018.04  मिलियन यूनिट (90% आश्रित वर्ष पर)

परियोजना लागत

4378.19 करोड़ रूंपए (अप्रैल,2001 के मूल्य स्तर पर)

लाभभोक्ता राज्य

जम्मू व कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, राजस्थान, संघ शासित क्षेत्र दिल्ली तथा चण्डीगढ़

टैरिफ/ दर

5.22 रू./ केडबल्यूएच (अप्रैल,2001 के मूल्य स्तर पर)

संचालन का वर्ष /पूरा होने का कार्यक्रम

भारत सरकार द्वारा निवेश मंजूरी प्रदान किए जाने की तारीख से 6 वर्ष 6 महीने ।

 

तकनीकी विशेषताएं

बांध

नीवं की अधिकतम गहराई स्तर से  252 मी. ऊँचा रॉकफिल बांध

हेडरेस टनल

11.5 मी. व्यास की, 4.7 कि.मी. लंबी हॉर्श-शू आकार की हेड रेस टनल

पावर हाउस

भूमिगत

टरबाइन का प्रकार

फ्राँसिस

अपरेटिंग हेड

255 मी.

टेलरेस टनल

8 मी. व्यास की प्रत्येक 810 मी. लंबी डी आकार की दो टेलरेस टनल  (परियोजना  घटक अनंतिम हैं इनमे संशोधन किया जा सकता है । )

 

वर्तमान स्थिति (31.07.2009 को )

 

·         जल संसाधन मंत्रालय द्वारा गठित एक समिति द्वारा इस योजना का पुर्नवलोकन किया गया तथा यह निर्णय किया गया कि बांध को केवल हंजल गांव के नजदीक रखा जाए तदनुसार एनएचपीसी एफ / डी पी आर तैयार करने की प्रक्रियाधीन है ।

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करमोली लुमटी तुल्ली परियोजना में आपका स्वागत है

 

परिचय

कारमोली लुमटी तुल्‍ली जल विद्युत परियोजना गौरीगंगा नदी पर प्रस्‍तावित है जो शारदा बेसिन की सहायक नदी है । गौरीगंगा नदी हिमालयन क्षेत्रों की 3600 मीटर की ऊंचाई पर मिलाम ग्‍लेश्यिर से निकलती है और लगभग 90 किलोमीटर के लिए दक्षिण-दक्षिण पूर्व दिशा में साधारणत: बहती है, इसके पश्‍चात् यह जौलजीबी के लगभग 1 किलोमीटर डाउनस्‍ट्रीम में काली नदी से मिलती है । काली नदी (शारदा) अंतत: गंगा नदी से जुड़ती है । गौरीगंगा के जलमग्‍न क्षेत्र में 29 ग्‍लेश्यिर्स और 346 स्‍कॉयर किलोमीटर स्‍थाई बर्फ से ढ़की चट्टानें हैं । इस जलमग्‍न क्षेत्र के मौसमी बर्फ से ढ़की क्षेत्र लगभग 810 स्‍कॉयर किलोमीटर है । कारमोली लुमटी तुल्‍ली की कुल जलमग्‍न क्षेत्र नक्‍शा 1855 स्‍कॉयर किलोमीटर है ।

 

मुख्य विशेषताएं

विशेषताएं

अवस्थिति

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिला में गांव धामीगांव

पहुंच

निकटतम रेल हेड - टनकपुर निकटतम हवाई अडडा - दिल्ली

क्षमता

55 मेगावाट (2x27.5 मेगावाट)

वार्षिक उत्पादन

241.51 मिलियन यूनिट (90% आश्रित वर्ष में)

परियोजना लागत

433.12 करोड़ रुपए (जून, 2003 मूल्य स्तर)

लाभाभोक्‍ता राज्य

उत्तरी क्षेत्र के सभी राज्य

टैरिफ दर

3.0 रु./केडब्ल्यूएच (जून,2003 मूल्य स्तर )

संचालन वर्ष/ पूरे होने का कार्यक्रम

सरकार की मंजूरी की तारीख से 04 वर्ष एवं 06 महीने

 

तकनीकी विशेषताएं

बांध

:

कंक्रीट ग्रेविटी, बुनियादी स्‍तर से 60 मीटर ऊंची

हेडरेस सुरंग

:

एक 5.75 मीटर लम्‍बी होर्श शू आकार     

प्रैशर शॉफ्ट/पेन स्‍टॉक

:

दो 3.5 गोलाकार, 85 मीटर लम्‍बी 

पावर हाउस

:

सतही

टरबाइन के प्रकार

:

वर्टिकल फ्रांसिस

नेट रेटेड हेड

:

56.6 मीटर

टेलरेस टनल

:

15 मीटर X 3 मीटर आकार, 200 मीटर लम्‍बा, खुला चैनल

 

 

 

 

 

वर्तमान स्थिति (30.06.2009 को)

 

  • एनएचपीसी द्वारा इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए एनएचपीसी उत्तरांखंड सरकार के बीच दिनांक 21.11.2005 को कार्यान्वयन करार पर हस्ताक्षर किया गया है परियोजना अस्कोट मुस्क डियर सेंचुरी में स्थित है राज्य सरकार ने एनबीडब्ल्यूएल को सेंचुरी की सीमा के पुर्नसीमांकन के लिए प्रस्ताव की सिफारिश कर दी है, जो एनबीडब्ल्यूएल/ सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन है माननीय सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति प्राप्त होने पर, एनएचपीसी निर्माण-पूर्व गतिविधियों के लिए मंजूरी हेतु पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से आग्रह करेगी  

गरबा तवाघाट परियोजना में आपका स्वागत है

 

परिचय

गरबा तवाघाट बहते पानी पर बनने वाली परियोजना है जिसमें विद्युत उत्‍पादन के लिए काली नदी (शारदा) के पानी का उपयोग किया जाना है ।

 

विशेषताएं

 

मुख्‍य विशेषताएं                       

अवस्थिति

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिला में गांव- गरबा

पहुंच

निकटतम रेल हेड - टनकपुर (215 किलोमीटर) निकटतम हवाई अडडा - दिल्ली

क्षमता

630 मेगावाट (3x 210 मेगावाट)

वार्षिक उत्पादन

2483.11 मिलियन यूनिट (90% आश्रित वर्ष में)

परियोजना लागत

1447.77 करोड़ रुपए (जून, 2003 मूल्य स्तर ) (पीएफआर, फरवरी 2004 पर आधारित)

लाभभोक्‍ता राज्य

उत्तरी क्षेत्र के सभी राज्य

टैरिफ/दर

0.9/ रु. केडब्ल्यूएच (जून, 2003 मूल्य स्तर) (पीएफआर, फरवरी, 2004 पर आधारित)

संचालन वर्ष/ संचालन अवधि

भारत सरकार द्वारा निवेश मंजूरी प्रदान किए जाने की तारीख से 5 वर्ष एवं 09 महीने ।

 

तकनीकी विशेषताएं

 

बांध

:

कंक्रीट ग्रेविटी, बुनियादी स्‍तर से 93 मीटर ऊंचा

हेडरेस टनल

:

एक 6.75 मीटर गोलाकार, 13.15 किलोमीटर लम्‍बी हार्श शू आकार 

पावर हाउस